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अस्पतालों के आईसीयू वार्ड मे लगवाए जाने चाहिय सीसीटीवी कैमरे।
जैसे-जैसे कोरोना महामारी ने विकराल रूप धारण किया। वैसे वैसे लोगों को अपने इलाज के लिए अस्पताल जाने की आवश्यकता पड़ने लगी। कुछ लोग तो साधारण दवाई से ही सही हो गए, लेकिन कुछ लोगों में कोरोना का इतना ज्यादा इंफेक्शन फैला कि उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा। भर्ती कराने के बाद कई बातें सामने आई जिनमें से मुख्य रूप से यह देखा गया कि कई अस्पतालों द्वारा मरीज को भर्ती कर लेने के बाद प्रत्येक दिन का अधिक से अधिक चार्ज वसूला जाने लगा और यह भी जानकारी प्राप्त नहीं हो पाती, की मरीज का इलाज किस तरह किया जा रहा है। मरीज को क्या दवाएं दी जा रही है कोरोना के कारण मरीज के संबंधी या मित्रों को मरीज के पास जाने की इजाजत है, ऐसी दशा में यह आवश्यक है की कम से कम अस्पतालों के आईसीयू वार्ड में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए जिससे कि मरीज के रिश्तेदार बाहर लगे टीवी में सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से अपने मरीज के हो रहे इलाज की जानकारी प्राप्त कर सके।
हाल ही में कुछ घटनाएं घटी जिनमें से एक दो ध्यान में आती है जिसमें एक तो देश के जाने माने शास्त्री गायक पंडित छन्नूलाल मिश्र जी वाराणसी के परिवार से जुड़ी है जिसमें वाराणसी के मेडविन हॉस्पिटल ने पंडित छन्नूलाल मिश्रा जी की बड़ी बेटी संगीता मिश्रा के बीमार होने पर इलाज के नाम पर डेढ़ लाख रुपया जमा कराया और उसके बाद भी इलाज में लापरवाही की गई परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने दिया नही दिया गया। जब प्रधानमंत्री जी के माध्यम से डीएम साहब के पास फोन आया तो उन्होंने मेडविन हॉस्पिटल फोन करके मिलवाने की बात कही इस पर भी अस्पताल कर्मचारियों द्वारा 1700 रु जमा कराकर PPE किट दिया और दूर से उनकी बेटी को दिखाया गया। इलाज में लापरवाही की वजह से संगीता जी की मृत्यु हो गई। उसके बाद भी अस्पताल द्वारा 4लाख रु की और माँग की गई।
पंडित छन्नूलाल मिश्र जी की पुत्री डॉ नम्रता मिश्रा द्वारा मीडिया के सामने दिया गया बयान।👇
दूसरी घटना मेरठ की है जहां लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के आईसीयू वार्ड में पिछले दिनों एक पेशेंट भर्ती हुआ उसका ऑक्सीजन लेवल 78 के आस पास था। 2 दिन बाद भी उनके परिजन को मरीज को देखने व मिलने नहीं दिया गया। जबकि शासन प्रशासन का आदेश है कि मरीज को परिजनों से वीडियो कॉल के जरिए दिखाया जाय। इसके लिये डीएम मेरठ को ट्वीट भी किया था और कोरोना कंट्रोल रूम से दूरभाष बात भी किया था उनका कहना था कि पीपीई किट पहनकर कोई एक सदस्य मिल सकता है। फिर भी अस्पताल द्वारा मरीज के परिजनों को मरीज से मिलने नहीं दिया गया।
न जाने पूरे देश में ऐसी कितनी घटना घटी होगी जिसमें परिवार वालों ने अपनों को खोया होगा व इन अस्पतालों के द्वारा मरीज के इलाज के नाम पर धन उगाही की गई होगी अतः मेरा मानना है कि अस्पतालों के हर आईसीयू वार्ड में सीसीटीवी लगा होना चाहिए जिससे कि मरीज के परिजन अपने मरीज का हाल-चाल उस के माध्यम से जान सकें।
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