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कोरोना महामारी के डर में भी सौरभ मौर्या ने दिया 63वीं प्लेटलेट का दान, कुल 107 यूनिट रक्तदान सम्पन्न।



एक और जहां लोगों के मन में डर है और लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे, वहीं दूसरी ओर वाराणसी के रहने वाले एवं 31 वर्ष की आयु में स्वैच्छिक रक्तदान के क्षेत्र में शतक लगाने वाले सौरभ मौर्या ने 63वीं बार प्लेटलेट का दान किया। कोरोना महामारी में लोगों के आगे ना आकर स्वेच्छा से रक्तदान ना कर पाने का सबसे बुरा असर ब्लड बैंक पर पड़ रहा है, ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी से जूझ रहे जरूरतमंदों की रक्त की कमी से मौत तक हो जा रही है। सोशल मीडिया पर सबसे मजबूत प्लेटफॉर्म ट्विटर है, जहां लोग एक दूसरे से जुड़कर अच्छे स्तर पर लोगों की मदद कर रहे हैं। 


वाराणसी के रहने वाले एशियन सबकॉन्टिनेंटल यंगेस्ट सेंचुरियन ब्लड डोनर सौरभ मौर्या ने बताया की ट्विटर के माध्यम से बीजेपी वाराणसी आईटी सेल से शशि शेखर जी द्वारा खबर मिली की वाराणसी के एक कैंसर अस्पताल में 4 वर्षीय बिटिया को प्लेटलेट की जरूरत है, जिसके लिए तत्काल मैं ब्लड बैंक पहुंचा और अपना 63वाँ प्लेटलेट दान किया, तत्पश्चात जानकारी यह भी मिली कि ब्लड की कमी से 5 वर्षीय एक बालक की मृत्यु बीती रात हो गई। सौरभ ने कहा कि आखिर कब तक जिम्मेदारी एक समाजसेवी या समाज के कुछ चुनिंदा लोगों की होगी, क्या यह जिम्मेदारी एक आम नागरिक की नहीं हो सकती? 5 वर्षीय बालक को बाजार में मिलने वाली किसी चीज की जरूरत नहीं थी, जो उसे लाकर दिया नहीं जा सका, उसे जरूरत थी मानव रक्त की जो सिर्फ एक स्वस्थ मानव द्वारा ही दिया जा सकता था, जो कि अधिकतर मात्रा में हमारे और आपके(इंसानों) पास मौजूद है, मगर सिर्फ कुछ तुच्छ भ्रांतियों की वजह से लोग रक्त दान व प्लाज़्मा दान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। सौरभ ने बताया कि जिस बिटिया के लिए उन्होंने प्लेटलेट दान किया है, उसी बिटिया को डब्ल्यूबीसी डोनर की भी सख्त आवश्यकता है,सौरभ ने कहा कि उन्होंने खुद डॉक्टर से पूछा कि आज मैं प्लेटलेट दे रहा हूं, मगर अब आगे डब्ल्यूबीसी कितने दिन बाद दे सकता हूं? डॉक्टर ने कहा कि 48 घंटे बाद आप प्लेटलेट दे सकते हैं, जिसपर  सौरभ ने तत्काल जवाब दिया कि 48 घंटे बाद की तैयारी कर लीजिए, मैं डब्ल्यूबीसी डोनेट करने आऊंगा। 


सौरभ ने बताया की टि्वटर के माध्यम से अब तक बहुत लोगों की मदद की जा चुकी है, मगर ब्लड बैंकों में ब्लड सिर्फ और सिर्फ लोगों के रक्तदान से ही संभव है। अतः सब से निवेदन है कि मानवता के लिये आगे आए और रक्तदान व प्लाज़्मा दान में सहयोग करें। आप का सहयोग किसी की जिंदगी बचा सकता है।

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